Attention के लिए शरारत क्यों करता है बच्चा? (Attention-seeking behaviour in kids)

            मेरा बच्चा आँखों में क्यों नहीं देखता? (Why my child is not making eye contact)बच्चा नाम लेने पर जवाब क्यों नहीं देता? (Child not responding to name – causes and concerns)मेरा बच्चा मम्मा-पापा क्यों नहीं बोलता? (Speech delay in children – early signs)क्या यह सिर्फ जिद है या कोई डेवलपमेंटल प्रॉब्लम?


 
एक माता-पिता के रूप में जब आप अपने बच्चे को बार-बार पुकारते हैं—“बेटा, इधर देखो”, “मम्मा को देखो”, “क्या चाहिए?”—और वह आपकी तरफ देखता ही नहीं, आँखों से संपर्क नहीं बनाता, आपके “मम्मा” या “पापा” कहने पर भी कोई खास प्रतिक्रिया नहीं देता, तो दिल में एक बेचैनी उठती है। कई माता-पिता इसे जिद समझ लेते हैं, कुछ इसे “नजरअंदाज करने की आदत” मान लेते हैं, और कुछ डर जाते हैं कि कहीं यह किसी बड़ी समस्या का संकेत तो नहीं।

एक अनुभवी स्पीच थेरेपिस्ट के रूप में मैं आपको यह समझाना चाहता हूँ कि यह व्यवहार सिर्फ एक “आदत” नहीं होता, बल्कि इसके पीछे बच्चे के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलू हो सकते हैं। सबसे जरूरी बात—इसे समय रहते समझना और सही दिशा में काम करना।

आज के समय में गूगल पर सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले सवालों में शामिल हैं—“मेरा बच्चा आँखों में क्यों नहीं देखता?”, “बच्चा नाम लेने पर जवाब क्यों नहीं देता?”, “बच्चा मम्मी-पापा नहीं बोलता क्या करें?”, “बच्चा attention के लिए शरारत क्यों करता है?”—और इन्हीं सभी सवालों का जवाब हम इस लेख में सरल और वास्तविक तरीके से समझेंगे।

सबसे पहले बात करते हैं eye contact की।
जब बच्चा आँखों में नहीं देखता, तो यह सिर्फ एक छोटा सा व्यवहार नहीं होता, बल्कि social connection की नींव कमजोर होने का संकेत हो सकता है। बच्चा जब आपकी आँखों में देखता है, तो वह सिर्फ देख नहीं रहा होता, बल्कि connect कर रहा होता है, समझ रहा होता है, और सीख रहा होता है। अगर यह कड़ी कमजोर है, तो communication भी धीरे-धीरे प्रभावित होने लगता है।

अब सवाल उठता है—“मेरा बच्चा नाम लेने पर क्यों नहीं देखता?”
इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। कभी-कभी बच्चा अपनी ही दुनिया में खोया रहता है, खासकर अगर वह स्क्रीन (मोबाइल/टीवी) का ज्यादा आदी हो गया हो। लेकिन अगर यह बार-बार हो रहा है, तो यह communication delay या social response delay का संकेत हो सकता है।

कई माता-पिता यह भी पूछते हैं—“मेरा बच्चा मम्मा-पापा क्यों नहीं बोलता?”
यह स्थिति तब और स्पष्ट होती है जब बच्चा ना eye contact बनाता है, ना नाम पर प्रतिक्रिया देता है, और ना ही अपनी जरूरतों को शब्दों में व्यक्त करता है। ऐसे में बच्चा frustration महसूस करता है और वही frustration कई बार nuisance behavior के रूप में बाहर आता है।

अब बात करते हैं उस व्यवहार की जिसे आप “attention पाने के लिए शरारत” कहते हैं।
जब बच्चा चीजें फेंकता है, जोर से चिल्लाता है, बार-बार परेशान करता है, तो वह असल में आपसे कुछ कहना चाह रहा होता है—लेकिन उसके पास सही शब्द या तरीका नहीं होता। इसलिए वह गलत तरीके से attention लेता है। और अनजाने में, जब हम उस पर तुरंत react करते हैं—डांटते हैं, चिल्लाते हैं—तो हम उस behavior को और मजबूत कर देते हैं।

अब समाधान की बात करते हैं—और यह सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।

सबसे पहले, अपने बच्चे के level पर आना सीखिए।
दूर से आवाज देने के बजाय उसके पास जाएं, उसके सामने बैठें, उसकी आँखों के level पर आकर उसका नाम लें। जैसे ही वह थोड़ा भी आपकी तरफ देखे, तुरंत positive response दें—“शाबाश, आपने मम्मा को देखा!” यह छोटे-छोटे moments ही आगे चलकर बड़े बदलाव लाते हैं।

दूसरा, eye contact को मजबूरी न बनाएं।
बहुत से माता-पिता बच्चे का चेहरा पकड़कर कहते हैं—“मेरी तरफ देखो!”—लेकिन इससे बच्चा और ज्यादा बचने लगता है। eye contact naturally develop होता है जब interaction मजेदार और engaging होता है।

इसलिए interaction को interesting बनाइए।
simple games खेलिए—peek-a-boo, bubbles, funny faces, आवाजों का खेल। जब बच्चा खुश होता है, हँसता है, तो वह खुद आपकी तरफ देखने लगता है। यही असली therapy है—connection बनाना।

तीसरा, बच्चे को सही तरीके से attention मांगना सिखाइए।
अगर बच्चा शरारत करके attention लेता है, तो उस समय ज्यादा प्रतिक्रिया न दें। लेकिन जब वह सही तरीके से—जैसे हाथ पकड़कर, इशारा करके या कोई आवाज निकालकर—attention मांगता है, तो तुरंत respond करें। इससे वह सीखता है कि अच्छा तरीका ज्यादा काम करता है।

चौथा, स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करना बेहद जरूरी है।
आज के समय में “बच्चा मोबाइल में लगा रहता है और किसी को देखता नहीं”—यह एक आम समस्या बन चुकी है। लेकिन सच यह है कि स्क्रीन communication नहीं सिखाती, बल्कि उसे कम कर देती है। बच्चे को real interaction चाहिए—आपकी आवाज, आपके चेहरे के expressions, आपका समय।

अब सबसे जरूरी सवाल—“क्या यह autism हो सकता है?”
अगर बच्चा लगातार eye contact avoid करता है, नाम लेने पर प्रतिक्रिया नहीं देता, speech delay है, और social interaction कम है, तो यह Autism Spectrum Disorder के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। लेकिन यह diagnosis सिर्फ एक विशेषज्ञ ही कर सकता है। इसलिए खुद से निष्कर्ष निकालने के बजाय सही मार्गदर्शन लेना जरूरी है।

यही वह जगह है जहाँ सही therapy और सही guidance फर्क पैदा करती है।

The Trisense Speech Therapy and Child Development Centre, B-150, Block B (in front of Summerville School), Rajajipuram, Lucknow – 226017, एक ऐसा केंद्र है जहाँ हम सिर्फ therapy नहीं करते, बल्कि हर बच्चे को समझते हैं। यहाँ हर बच्चे के behavior, उसकी जरूरतों और उसकी learning style को ध्यान में रखते हुए personalized therapy दी जाती है।

हमारा उद्देश्य सिर्फ बच्चे को बोलना सिखाना नहीं है, बल्कि उसे socially interactive बनाना है—ताकि वह आँखों में देख सके, अपने parents से connect कर सके, अपनी जरूरतों को express कर सके और धीरे-धीरे self dependent बन सके।

अगर आपका बच्चा eye contact नहीं करता, नाम लेने पर प्रतिक्रिया नहीं देता, “मम्मा-पापा” नहीं बोलता, या attention पाने के लिए बार-बार nuisance करता है—तो यह समय है सही कदम उठाने का। Early intervention ही सबसे effective solution है।

The Trisense Speech Therapy and Child Development Centre में हम पूरी dedication के साथ, हर possible limit तक therapy देते हैं ताकि आपका बच्चा अपने best version तक पहुँच सके।

अंत में, एक बात दिल से—आपका बच्चा आपको ignore नहीं कर रहा, वह सिर्फ अपने तरीके से दुनिया को समझ रहा है। उसे आपकी जरूरत है—आपके समय की, आपके धैर्य की, और सही मार्गदर्शन की।

और जब parent और therapist साथ मिलकर काम करते हैं, तो कोई भी दूरी—चाहे वह आँखों की हो या दिल की—धीरे-धीरे खत्म हो जाती है।

Comments

Popular posts from this blog

Developmental Delay in Children: Symptoms, Causes & Best Therapy in Rajajipuram Lucknow

Best Speech Therapy Centre for a reason

बच्चों में स्पीच डिले के कारण, लक्षण और इलाज (Lucknow में Best Treatment)